Wednesday, 11 June 2014

सावधान! अकाल डूब मरते हैं "खतरों के खिलाड़ी"

सुनहरे कल के न जाने कितने ख्वाब देख डाले होंगें, उन आंखों ने जिन्होंने अभी-अभी तो दुनिया को देखना-समझना, परखना, जांचना शुरू किया था। अभी तो बस शुरू ही हुआ था सफर हौसलों की उंगली थामकर खुद को साबित करने का। सफर माता-पिता या परिवार की हसरतों को परवान चढ़ाने का। अभी तो बढ़ाए थे मंजिल की ओर चंद कदम इस उम्मीद के साथ कि जीत लेना है सारे जहां को अपने जोश और उमंग से। अभी तो लहराना था उन्हें नीले आकाश में अपनी जीत का परचम लेकिन अफसोस.....!उनकी आंखें मुंद गईं वक्त से पहले ही और इन आखों के मंुदने के साथ ही मंुद गए वे सभी ख्वाब, जो उनसे वाबस्ता थे बस चंद रोज पहले तक ही....!!! ‘ब्यास नदी‘ में 24 जवां जिंदगियों के डूबने के साथ ही डूब गईं ये सारी उम्मीदें और ख्वाब।
उत्तरांचल का ताजा ‘लार्जी डैम हादसा‘ यंू तो देश में होने वाले उन तमाम हादसों की गिनती में इजाफा करता है जो प्रशासन की लापरवाही के कारण होते हैं,लेकिन जब सवाल आज की पढ़ी-लिखी, जागरूक युवा पीढ़ी का हो तो गौर-ओ-फिक्र कुछ गहरी होनी चाहिए कि आखिर क्यों ये युवा जोश में होश गवां बैठने की गलती कर गए या इन जैसे कई अन्य युवा भी अक्सर कर जाया करते हैं? क्या इसके लिए युवाओं को परोसे गए बेलगाम और जिंदगी जैसी बेशकीमती चीज से खिलवाड़ करना सिखाने वाले मनोरंजक कार्यक्रमों और विज्ञापनों या फिल्मों को भी दोष नहीं दिया जाना चाहिए। आपने भी इस तरह के कार्यक्रम घर पर चाय की चुस्कियां लेते हुए कभी न कभी तो जरूर देखे होंगे। एक शीतल पेय के विज्ञापन का उदाहरण देती हंू-पंच लाइन है-‘डर के आगे जीत है‘। इस विज्ञापन में युवा उन सीमाओं को पार करते नजर आते हैं जहां पहंुचकर इंसान की रूह अक्सर थर्रा जाया करती है। सधे-सधाए लोगों के लिए तो ठीक है,लेकिन इस तरह के विज्ञापनों का अनुसरण करना साधारण लोगों के लिए जानलेवा साबित हो सकता है। ऐसे विज्ञापनों की नकल करने से घर के भीतर तो हम बच्चों को रोक देते हैं,लेकिन बाहर हमारे युवा बच्चे ‘एडवेंचर‘ के चक्कर में कब अपनी जान से खिलवाड़ कर बैठें इसका इल्म हमें नहीं हो पाता। हाल ही में रणबीर कपूर और दीपिका पादुकोण की फिल्म ‘जवानी दीवानी‘, कैटरीना कैफ की मल्टी स्टारर फिल्म ‘जिंदगी न मिलेगी दोबारा‘ भी युवाओं को जान का जोखिम लेने की सीख देने वाली हैं। अभिनेता अक्षय कुमार व निर्देशक रोहित शेट्टी की ओर से होस्ट किए जाने वाला रियलिटी शो ‘खतरों के खिलाड़ी‘ भी इसी कड़ी में शामिल है। शो के ताजा सीजन के एपिसोड की शुरुआत में ही रोहित शेट्टी यह दर्शाते कहते दिखाई देते हैं कि ‘हम उन सीमाओं के पार जाकर खतरों से खेलेंगे जहां अक्सर चेतावनी देने वाले बोर्ड लगे होते हैं‘। इस तरह के प्रचार और मनोरंजन पर रोक लगनी चाहिए।
क्या हुआ हादसाः
आठ जून को हैदराबाद के एक ‘इंजीनियरिंग कालेज‘ के छात्र कालेज की ओर से टूर पर निकले थे। हिमाचल प्रदेश के मंडी इलाके में लार्जी डैम के पास नदी के बीचोबींच उतरकर उनमें से कुछ युवा मौज-मस्ती करने लगे, वे फोटो खींच रहे थे, वीडियो बना रहे थे कि अचानक लार्जी डैम से पानी छोड़ दिया गया। इससे नदी का जल स्तर काफी बढ़ गया और तेज बहाव में करीब 24 युवा बह गए। सर्च आपरेशन में अब तक आठ शव बरामद.

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